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बौद्ध भिक्षुओं ने किया वर्षावास की पूजा

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इकौना-श्रावस्ती। बौद्ध सांस्कृतिक महासभा बुद्ध विहार श्रावस्ती में वर्षावास पूजा के दौरान हिमालयन बौद्ध भिक्षु जलछनलामा ने कहा कि बौद्ध धर्म में वर्षावास का विशेष महत्व है।वर्षावास के दौरान बौद्ध भिक्षु तीन महीने तक विचरण नहीं करेंगे और एक जगह पर रहकर भगवान बुद्ध का ध्यान लगाएंगे और पूजा-अर्चना करेंगे।

इस वर्ष बौद्ध भिक्षुओं का त्रैमासिक वर्षावास अनुष्ठान कर रहे हैवर्षावास काल व्यतीत करने वाले भिक्षु एक ही स्थान पर रहकर ध्यान-साधना और पूजा-अर्चना करेंगे।भिक्षु विचरण नहीं करेंगे।समस्त जीवों के कल्याण की कामना की संकल्प लेकर ये बौद्ध भिक्षु वर्षावास में रहेंगे।

एक स्थान पर रहकर बुद्ध के करुणा,शील और त्याग के सिद्धांतों का पूर्णरूपेण पालन करना होता है।अपना सारा समय लोगों की भलाई और तपस्या में लगाना होता है। विचरण न करने के पीछे मान्यता है कि वर्षा ऋतु में कई तरह के छोटे-छोटे जीव जन्म लेते हैं, जो विचरण करने से पैर से दब सकते हैं।इससे जीव की हत्या होती है।

इससे बचने के लिए तीन माह वर्षावास व्यतीत किया जाता है। कई देशों के बौद्ध मठों में बौद्ध भिक्षु यहां वर्षावास व्यतीत करने आते है।

बुद्ध ने कहा था कि वर्षाकाल में गांवों में भिक्षाटन के लिए नहीं जाएं क्योंकि भिक्षुओं के समूह में चलने से कृषि को काफी नुकसान हो सकता है।इस दौरान भिक्षु बौद्ध धर्म की बारीकियों का अध्ययन करते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा से आश्विन पूर्णिमा तक किसी एक ही विहार में रहने का संकल्प लेते हैं।

वर्षावास काल समाप्त होने के बाद बौद्ध मंदिरों में कठिन चीवरदान की परंपरा की शुरूआत होगी जो एक माह तक विभन्नि बौद्ध मठों में चलेगी।चीवर दान समारोह में विभिन्न देशों के बौद्ध श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। 

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